फासलों के लिए एक दीवार होना चाहिए....अरशद अली

  • Sunday, May 7, 2017
  • by
  • Arshad Ali
  • बेवजह लड़ने का इल्म
    भी मेरे यार होना चाहिए ।

    सामने से आये कोई
    तो वार होना चाहिये ।

    टालना मैंने नही सीखा
    किसी बात को

    सवाल पर जवाब का
    प्रहार होना चाहिए ।

    बेशक अमन कीमती
     है किसी घर के लिए

    फासलों के लिए
    एक दीवार होना चाहिए।

    जंग जितने का हुनर
    एक हीं है "अली"

    सर कटाने को
    हमेशा तैयार होना चाहिए।

    अरशद अली
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    Quranic Healing क़ुरआन के तरीक़े से हर बीमारी का इलाज मुमकिन है

  • Tuesday, March 7, 2017
  • by
  • HAKEEM YUNUS KHAN
  • सेहत आज एक बड़ा मसला बन गई है। तन और मन के पुराने रोगों के अलावा नए नए नाम से बहुत से रोग सामने आ रहे हैं। डॉक्टर और अस्पतालों की बढ़ती संख्या के साथ बीमारों और दवाओं की संख्या भी बढ़ रही है।
    दिल, गुर्दे और लिवर की फ़ेल होने की घटनाएं बढ़ रही हैं। नामर्दी और बांझपन के केसेज़ बढ़ रहे हैं। जुर्म और ज़ुल्म के वाक़यात बढ़ रहे हैं।
    अमीरी और ग़रीबी के बीच फ़ासला बढ़ रहा है। जिनके पास दुनिया की ऐश के सारे सामान हैं वे भी उसी तरह निराश और दुखी हैं जैसे कि वे, जिनके पास ‘नहीं’ है।
    इस सबके बीच एक सबसे अच्छी बात यह हुई कि मॉडर्न साईन्स ने यह साबित कर दिया है कि बीमारियाँ अपनी नेचर में मनोदैहिक यानि सायकोसोमैटिक होती हैं। तन और मन का आपस में सम्बन्ध है।
    मनुष्य का रक्त अपनी नेचर में अल्कलाईन है। जब ग़लत खान पान से इसमें एसिड बढ़ जाता है तो इसमें ऑक्सीजन का लेवल डाउन हो जाता है।

    मनुष्य का शरीर ख़ुशी की मनोदशा में सबसे अच्छा काम करता है। जब ग़लत तरह से सोचने के नतीजे में मन में चिन्ता और डर समा जाते हैं तो ख़ुशी ख़त्म हो जाती है। इससे ऊर्जा का लेवल डाउन हो जाता है।
    जब इन्सान अपनी तन और मन की नेचर को बदल देता है तब उसके तन और मन में बिगाड़ आना शुरू हो जाता है। इसके बाद वह बीमारी, झगड़े, क़जऱ् और ग़रीबी के हालात का शिकार होने लगता है। ये हालात बहुत हो सकते हैं। इन सब हालात को गिना नहीं जा सकता लेकिन इन सबको सिर्फ़ एक चीज़ से मिटाया जा सकता है।
    इन्सान अपनी नेचर को पहचाने, जिस पर उसे रब ने पैदा किया है और उसकी तरफ़ पलट कर आए। यही रब की तरफ़ पलटकर आना यानि तौबा करना कहलाता है।
    जिन कामों से मन को शाँति मिलती है, उनमें रब के साथ होने और उसके मेहरबान और मददगार होने जैसे गुणों को याद करना भी है। नमाज़ का मक़सद ही रब को याद करना ही है। यह पाँच समय तो अनिवार्य है ही, इनके अलावा पचास तरह की नफि़ल नमाज़ और भी हैं।
    खाने पीने में हलाल और हराम तय करने और रोज़ों का फ़ायदा भी शरीर को मिलता है। शरीर से एसिड कम होता चला जाता है।
    तिब्बे नबवी की सादा और पौष्टिक डाइट से सारे टॉक्सिन्स शरीर से बाहर निकल जाते हैं, जो कि सब रोगों का कारण बनते हैं।
    पानी और शहद का काफ़ी इस्तेमाल और क़ुरआन का बहुत ज़्यादा पढ़ना तन और मन को शुद्ध और निरोगी करने का यक़ीनी तरीक़ा है।
    जो लोग क़ुरआन पढ़ नहीं सकते, वे ईयर फ़ोन के ज़रिये सुनते रहें तो भी उनके मन को शाँति मिलेगी, जो कि भौतिक जगत का सत्य बनकर प्रकट होगी।
    यह सबसे आसान और नेचुरल तरीक़ा है। इसे साईन्स प्रमाणित करती है।
    इसे सीखकर आप सेहतमन्द रह सकते हैं। किसी इन्सान को आप किसी ऐसे रोग से पीडि़त पाएं, जिसे एलोपैथी में लाइलाज माना जाता है तो आप उसे कहें कि वह अपना एलोपैथिक इलाज जारी रखे और हमारा बताया हुआ तरीक़ा भी शुरू कर दे। जिससे उसके शरीर और मन से ज़हर दूर हो जाएगा। वह ठीक हो जाएगा।
    मन के ज़हर को दूर कीजिए, शरीर से ज़हर को निकालिए।
    जो विचार मन की शांति का नष्ट करते हैं, वे मन के लिए ज़हर का काम करते हैं।
    जो तत्व शरीर को नुक्सान पहुंचाते हैं। वे शरीर का कचरा हैं।
    यह कचरा शरीर की कोशिकाओं से केवल तब निकलता है जबकि मन शाँत हो। क़ुरआन मन को शाँति देता है। इसके साथ जब आप शहद और पानी पीते हैं तो शरीर का सारा कचरा बाहर आ जाता है।
    यह बार बार का आज़माया हुआ साईन्टिफि़क फ़ैक्ट है।

    इस एक काम से आप सब रोगों की जड़ काट देते हैं। अपनी और अपने परिवार की सेहत के लिए आप इसे आज़मा कर देखिए। यह बिल्कुल फ़्री सिखा रहे हैं और वह भी घर बैठे। किसी को और ज़्यादा पूछना हो तो हमसे पूछ ले।
    हम आपके शुक्रगुज़ार हैं। इस ज्ञान को दूसरों को शेयर कीजिए। वे भी आपके शुक्रगुज़ार होंगे।
    आने वाले समय में ज़्यादातर लोग मन की शक्ति से निरोग होना सीख लेंगे। इन शा अल्लाह!
    -डॉ. अनवर जमाल
    My Email:hiremoti@gmail.com

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    Positive Mind, Positive Life

  • Monday, February 27, 2017
  • by
  • DR. ANWER JAMAL
  • दोस्तों! यह साल अच्छा है और अपना हाल भी अच्छा है.
    सबकी भलाई की नीयत से हम अच्छे काम कर रहे हैं.
    सबका भला हो, आप भी ऐसे ही कामों को अंजाम दे रहे होंगे. ऐसी आशा है.

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    कैसा तेरा प्यार था

  • Wednesday, January 27, 2016
  • by
  • ई. प्रदीप कुमार साहनी
  • (तेजाब हमले के पीड़िता की व्यथा)

    कैसा तेरा प्यार था ?
    कुंठित मन का वार था,
    या बस तेरी जिद थी एक,
    कैसा ये व्यवहार था ?

    माना तेरा प्रेम निवेदन,
    भाया नहीं जरा भी मुझको,
    पर तू तो मुझे प्यार था करता,
    समझा नहीं जरा भी मुझको ।

    प्यार के बदले प्यार की जिद थी,
    क्या ये कोई व्यापार था,
    भड़क उठे यूँ आग की तरह,
    कैसा तेरा प्यार था ?

    मेरे निर्णय को जो समझते,
    थोड़ा सा सम्मान तो करते,
    मान मनोव्वल दम तक करते,
    ऐसे न अपमान तो करते ।

    ठान ली मुझको सजा ही दोगे,
    जब तू मेरा गुनहगार था,
    सजा भी ऐसी खौफनाक क्या,
    कैसा तेरा प्यार था ?

    बदन की मेरी चाह थी तुम्हे,
    उसे ही तूने जला दिया,
    आग जो उस तेजाब में ही था,
    तूने मुझपर लगा दिया ।

    क्या गलती थी मेरी कह दो,
    प्रेम नहीं स्वीकार था,
    जीते जी मुझे मौत दी तूने,
    कैसा तेरा प्यार था ?

    मौत से बदतर जीवन मेरा,
    बस एक क्षण में हो गया,
    मेरी दुनिया, मेरे सपने,
    सब कुछ जैसे खो गया ।

    देख के शीशा डर जाती,
    क्या यही मेरा संसार था,
    ग्लानि नहीं तुझे थोड़ा भी,
    कैसा तेरा प्यार था ?

    अब हाँ कह दूँ तुझको तो,
    क्या तुम अब अपनाओगे,
    या जो रूप दिया है तूने,
    खुद देख उसे घबराओगे?

    मुझे दुनिया से अलग कर दिया
    जो खुशियों का भंडार था,
    ये कौन सी भेंट दी तूने,
    कैसा तेरा प्यार था ?

    दोष मेरा नहीं कहीं जरा था,
    फिर भी उपेक्षित मैं ही हूँ,
    तुम तो खुल्ले घुम रहे हो,
    समाज तिरस्कृत मैं ही हूँ ।

    ताने भी मिलते रहते हैं,
    न्याय नहीं, जो अधिकार था,
    अब भी करते दोषारोपण तुम,
    कैसा तेरा प्यार था ?

    क्या करुँ अब इस जीवन का,
    कोई मुझको जवाब तो दे,
    या फिर सब पहले सा होगा,
    कोई इतना सा ख्वाब तो दे ।

    जी रही हूँ एक एक पल,
    जो नहीं नियति का आधार था,
    करती हूँ धिक्कार तेरा मैं,
    कैसा तेरा प्यार था ?

    -प्रदीप कुमार साहनी
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    नया साल 2016 आप सबको मुबारक हो

  • Thursday, December 31, 2015
  • by
  • DR. ANWER JAMAL
  • आप सबको नया साल २०१६ मुबारक हो.
    रब की रहमत सबके काम बनाती आ रही है और वही हमें अपनी रहमत से कामयाबी दे. आमीन.

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    Golden World यक़ीनन आपका कल सुनहरा है

  • Monday, December 14, 2015
  • by
  • DR. ANWER JAMAL
  • प्रश्नः अनवर साहब, आज जो विश्व में हो रहा है, उसका उपसंहार क्या होगा? आप एक क़ाबिल इंसान हैं, आप कल को कैसा पाते हैं?
    हमारे ब्लाॅग के एक क़ाबिल पाठक भाई दशरथ दुबे जी ने यह सवाल हमसेपिछली ब्लाॅग पोस्ट पर किया है।
    इसके जवाब में यह पोस्ट हाजि़र है।
    उत्तरः जो कुछ विश्व में कल हुआ था, उससे आज के हालात बने और ये बहुत अच्छे हालात हैं, इनमें कुछ हालतें जीवन के खि़लाफ़ हैं लेकिन यही हालतें वास्तव मे जीवन को सपोर्ट करती हैं जैसे कि रात का अंधेरा दिन के उजाले के ठीक उलट दिखता है लेकिन रात का अंधेरा हमारे जीवन के लिए उतना ही ज़रूरी है, जितना कि दिन का उजाला।
    तनाव, दंगे और जंगें, जो आज दुनिया में दिखाई दे रही हैं, ये सब शांति की शदीद ज़रूरत का एहसास करवा रही हैं।
    यहां ‘डिमांड एंड सप्लाई’ का नियम काम कर रहा है। शांति की मांग का मतलब है कि शांति की सप्लाई यक़ीनी है। यह प्रकृति का नियम है। यह हर हाल में हो कर रहने वाली बात है।
    आप देखेंगे कि आज विश्व में पहले से कहीं ज़्यादा संस्थाएं विश्व शांति के लिए काम कर रही हैं।
    उन सबकी नीयत और मेहनत हमें यक़ीन दिलाती है कि हमारा कल सुरक्षित है और वह सुनहरा भी है।
    हक़ीक़त यह है कि हमें दुनिया ठीक नज़र आएगी, अगर हम उसे ठीक नज़रिए से देखना चाहें।
    दुनिया की घटनाओं से हमारा विश्वास हरगिज़ प्रभावित न होना चाहिए बल्कि हमें उससे उसकी ज़रूरत को समझकर उसके साॅल्यूशन तक पहुंचना चाहिए और फिर पूरे विश्वास के साथ उस साॅल्यूशन को दुनिया में वुजूद में लाने की कोशिश करनी चाहिए।
    हमारी आज की नीयतें और अमल ही हमारे कल को तय करती हैं।
    ...और हरेक व्यक्ति को यह देखना चाहिए कि उसने कल के लिए क्या भेजा है?
    पवित्र क़ुरआन 59:18
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    सत्‍यमेव जयते ! ... (?): इस पर बोलिए हुजूर...

  • Tuesday, December 8, 2015
  • by
  • Atul Shrivastava
  • सत्‍यमेव जयते ! ... (?): इस पर बोलिए हुजूर...: लोकसभा में सांसद अभिषेक सिंह बड़े दिनों बाद टीवी पर लोकसभा की कार्रवाई का सीधा प्रसारण देखा, देखने की वजह थी, सांसद (राजनांदगांव) कार्य...
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    हिंदी मासिक पत्रिका "ह्यूमन टुडे" के लिए रचनाये आमंत्रित

  • Tuesday, November 24, 2015
  • by
  • हरीश सिंह
  • सभी ब्लॉगर मित्रों को नमस्कार
    बहुत दिन बाद आप मित्रों के सम्मुख आने का मौका मिला , मित्रों नव प्रकाशित हिंदी मासिक पत्रिका "ह्यूमन टुडे " को सम्पादन करने की जिम्मेदारी मिली है. ऐसे में आपलोगों की याद आनी स्वाभाविक है. भले ही इतने दिनों तक गायब रहा लेकिन आपसे दूर नहीं , मैं चाहता हूँ की जो ब्लॉगर मित्र अपनी रचनाओ के माध्यम से मुझसे जुड़ना चाहते है , मै  उनका सहर्ष स्वागत करता हूँ।  सामाजिक सरोकारों से जुडी इस पत्रिका में आपकी रचनाओ का स्वागत है , जो मित्र मुझसे जुड़ना चाहते हैं वे अपनी रचनाएँ मुझे मेल करें। ।
    humantodaypatrika@gmail.com
    रचनाएँ राजनितिक , सामाजिक व् ज्ञानवर्धक हो। कविता , कहानी व विभिन्न विषयो पर लेख आमंत्रित।
    harish singh ---- editor- Humantoday

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    आतंकवाद:मीडिया के कट पेस्ट का कमाल

  • Monday, November 23, 2015
  • by
  • DR. ANWER JAMAL
  • आतंकवाद को दुनिया का मीडिया कैसे दिखाता है और उसे समझदार लोग कैसे देखते हैं, इसका पता आज अचानक तब चला, जब जल्दी की वजह से ब्लाॅगर की स्पेलिंग टाईप यह हो गईं-
    http://blogg.com/
    ...और नज़र आए यह कार्टून-



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    प्राकृतिक चितिक्सा के हिमायती थे बापू

  • Thursday, October 8, 2015
  • by
  • M. Afsar Khan
  • हिन्दी दैनिक
     न्यू ब्राइट स्टार
     हरियाणा
    02 अक्टूबर 2015
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    निर्भीक-आजाद पंछी: हमारे जीवन का दर्शन ( सितम्बर -2015 )

  • Sunday, August 30, 2015
  • by
  • Journalist Ramesh Kumar Nirbhik
  • 1 सितम्बर 2015 :मान-शान की इच्छा से दिये गए लाख रूपये की तुलना में
    प्रेम व ईमानदारी से दान किये गए मुट्ठी भर चावल का अधिक महत्व है.
    2 सितम्बर 2015 : यदि आप हिम्मत का पहला कदम आगे बढायेगे तब परमात्मा की सम्पूर्ण मदद मिल जायेगी.
    3 सितम्बर 2015 : मुस्कराना, संतुष्टता की निशानी है. इसलिए सदा मुस्कराते रहो.
    4 सितम्बर 2015 : क्या मेरे विचारों का स्तर ऐसा है कि मैं परमात्मा का बच्चा कहलाने का अधिकारी हूँ.
    5 सितम्बर 2015 : स्वयं में दैवी गुणों का आह्वान करो तो अवगुण भाग जायेंगे.
    6
    सितम्बर 2015 : एक अच्छा, स्वच्छ मन वाला व्यक्ति दूसरों की विशेषताओं को
    देखता है. दूषित मन वाला व्यक्ति दूसरों में बुराई ही तलाशता है.
    7 सितम्बर 2015 : जो संकल्प करो उसे बीच-बीच में दृढ़ता का ठप्पा लगाओ तब विजयी बन जायेंगे. आगे पढ़े......

    निर्भीक-आजाद पंछी: हमारे जीवन का दर्शन ( सितम्बर -2015 )

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    पतंजलि के योग दर्शन में सूर्य नमस्कार नहीं है

  • Wednesday, June 10, 2015
  • by
  • DR. ANWER JAMAL
  • पतंजलि के योग दर्शन में सूर्य नमस्कार नहीं है। सूर्य नमस्कार तो क्या उसमें सुखासन के सिवा और कोई दूसरा आसन ही नहीं है। योग करने के लिए सुखासन काफ़ी है। योग है चित्त की नकारात्मक वृत्ति का निरोध करना। सुखासन में बैठो और अपने चित्त की वृत्ति का निरोध करते रहो। इसमें किसी मुसलमान को कोई आपत्ति नहीं होगी लेकिन जब योग के नाम पर शिर्क और कुफ्र (मिश्रकपन और नास्तिकता) थोपा जाएगा तो उसे वही क़ुबूल करेगा जिसे सत्य, तथ्य और अध्यात्म का ख़ाक पता नहीं है। ऐसे ही गुरू आज विश्व में योग के प्रचारक बने घूम रहे हैं।
    हमने योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा में डिप्लोमा किया है, जो इस बात का सुबूत है कि मुसलमानों योग का नहीं बल्कि कूटनीतिक हथकंडों का विरोध करते हैं।
    आओ सब मिलकर नमाज़ अदा करें, जो कि संतुलित और पूर्ण योग है, सरल है।

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    गर्मियों की छुट्टियां

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